जर्मनी की ’50+1′ फुटबॉल रूल को मिली कानूनी मंजूरी, लेकिन इन क्लबों को बदलने होंगे नियम
जर्मनी की संघीय एंटी-ट्रस्ट एजेंसी ने बुंडेसलीगा (Bundesliga) में फैन ओनरशिप को लेकर चल रही लंबी कानूनी समीक्षा के बाद अपना अंतिम निर्णय सुना दिया है। इस फैसले से जर्मन फुटबॉल के चर्चित ’50+1′ नियम को एक बड़ी कानूनी मजबूती मिली है। हालांकि, एजेंसी ने बायर लीवरकुसेन, वीएफएल वोल्फ्सबर्ग, आरबी लीपज़िग और हनोवर 96 की संरचनाओं में बदलाव की मांग भी की है।
जर्मन प्राधिकरण ने ’50+1′ नियम की जांच के बाद इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया है। एजेंसी का मानना है कि भले ही यह नियम निवेश के लिए आर्थिक प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है, लेकिन क्लब की पहचान को बनाए रखने और सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य इसे यूरोपीय प्रतिस्पर्धा कानून के तहत उचित ठहराते हैं।
हालांकि, यह पूरी तरह से बिना शर्त समर्थन नहीं है। बुंडेसकार्टेलम्ट (Bundeskartellamt) का कहना है कि ’50+1′ नियम तभी कानूनी रूप से मान्य रह सकता है जब DFL इसे लगातार लागू करे और क्लबों के बीच ऐसे अंतर न रखे जिन्हें निष्पक्ष रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता।
’50+1′ नियम क्या है?
यह नियम सुनिश्चित करता है कि क्लब की पेशेवर फुटबॉल इकाई को किसी कॉर्पोरेट इकाई (GmbH या AG) में बदलने के बावजूद, क्लब का सदस्य-नियंत्रित मूल संघ ही बहुमत के वोटिंग अधिकार अपने पास रखे। जर्मन प्रशंसकों के लिए, वित्तीय नियमों की तुलना में यह मुद्दा भावनाओं से अधिक जुड़ा है।
कुछ क्लब—जैसे लीवरकुसेन, वोल्फ्सबर्ग और लीपज़िग—पारंपरिक ’50+1′ मॉडल से अलग स्थिति में हैं, जहां निजी या मूल कंपनी की पूंजी का प्रभाव अधिक है। एंटी-ट्रस्ट कार्यालय अब इन विसंगतियों को दूर करना चाहता है।
लीवरकुसेन और वोल्फ्सबर्ग की छूट पर सवाल
बायर लीवरकुसेन और वोल्फ्सबर्ग को बायर एजी (Bayer AG) और वोक्सवैगन एजी (Volkswagen AG) के लंबे जुड़ाव के कारण ‘बेनेफैक्टर’ छूट मिली हुई है। कार्टेल कार्यालय के अनुसार, इन व्यवस्थाओं में अभी और सुधार की आवश्यकता है। प्राधिकरण का मानना है कि लीवरकुसेन और वोल्फ्सबर्ग के लिए प्रस्तावित ‘ग्रैंडफादरिंग’ व्यवस्था यूरोपीय न्यायालय के न्यायशास्त्र के तहत अपर्याप्त है। भविष्य में सभी क्लबों के लिए समान प्रतिस्पर्धी स्थिति अनिवार्य होनी चाहिए।
आरबी लीपज़िग को सदस्यता बढ़ाने की चेतावनी
लीपज़िग का मामला अलग है। यहाँ मुख्य आलोचना क्लब के पंजीकृत संघ की संरचना और उसके अत्यधिक प्रतिबंधित वोटिंग सदस्यों को लेकर है। एजेंसी का संदेश साफ है कि लीपज़िग को समर्थकों को सामान्य वोटिंग सदस्यता का वास्तविक अधिकार देना होगा।
हनोवर 96 के वोट पर भी चिंता
हनोवर 96 और बोर्ड सदस्य मार्टिन काइंड का मामला भी एजेंसी की जांच के दायरे में है। प्राधिकरण ने 2023/24 की निजी-इक्विटी प्रक्रिया के दौरान हुए एक गुप्त मतदान में काइंड की भूमिका और DFL द्वारा इसकी निगरानी पर सवाल उठाए हैं।
कुल मिलाकर, एंटी-ट्रस्ट कार्यालय ने DFL को स्पष्ट संदेश दिया है कि ’50+1′ नियम बरकरार रह सकता है, लेकिन इसका चयनात्मक या असंगत तरीके से कार्यान्वयन स्वीकार्य नहीं होगा। जर्मन फुटबॉल के लिए यह फैसला एक अनुकूल कानूनी परिणाम लेकर आया है, साथ ही यह स्पष्ट किया है कि इस नियम को व्यवहार में कैसे लागू किया जाना चाहिए।
