रेफरी की बड़ी गलती के कारण फिर खेला जाएगा एफए कप का मैच
मलबर्टन वांडरर्स और वुडफोर्ड टाउन के बीच एफए कप का मुकाबला एक रेफरी की गलती की वजह से सुर्खियों में है। इस तकनीकी चूक के कारण अब मैच को दोबारा खेला जाएगा।
मलबर्टन ने उस दिन मैच 2-1 से जीता था, लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी वुडफोर्ड ने इस परिणाम के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विरोध का कारण यह था कि वुडफोर्ड का एक पेनल्टी गोल रेफरी ने यह कहकर रद्द कर दिया कि हमलावर टीम के खिलाड़ी पेनल्टी एरिया में पहले घुस गए थे। इसके बजाय रेफरी ने मलबर्टन को इनडायरेक्ट फ्री-किक दे दी।
फुटबॉल के ‘लॉ 14’ के अनुसार, रेफरी को उस स्थिति में पेनल्टी को दोबारा लेने का आदेश देना चाहिए था। फुटबॉल एसोसिएशन की एक उप-समिति ने रेफरी की इस तकनीकी गलती को स्वीकार किया और मंगलवार को मैच फिर से कराने का आदेश दिया।
मलबर्टन, जो इस्तमियन लीग नॉर्थ में खेलते हैं, का दावा है कि दोबारा मैच कराने का फैसला परिणामों की अंतिम स्थिति और खेल की निष्पक्षता पर बुरा असर डाल सकता है। हालांकि, खेल के नियमों के गलत इस्तेमाल के कारण मैच का दोबारा होना कोई नई बात नहीं है।
2006 में एडगवेयर टाउन और हेरफील्ड यूनाइटेड के बीच हुआ मैच भी इसी तरह की रेफरी की गलती के कारण दोबारा खेला गया था। उस समय भी पेनल्टी पर हमलावर टीम के प्रवेश करने पर रेफरी ने गलत निर्णय लिया था। कप मुकाबलों में इस तरह के रिप्ले की संभावना अधिक होती है, क्योंकि गलत निर्णय सीधे प्रतियोगिता के परिणाम को प्रभावित करता है।
क्या वीएआर (VAR) के साथ भी ऐसा हो सकता है?
इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड इस मामले में स्पष्ट है कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) द्वारा लिए गए गलत निर्णयों के आधार पर मैच को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।
मैनचेस्टर डर्बी के दौरान हुए विवादित गोल का उदाहरण लें, तो वीएआर ने उस स्थिति का गलत आकलन किया था। इसे ‘कानूनों का गलत प्रयोग’ नहीं, बल्कि एक मानवीय भूल माना जाता है। इसी तरह, लिवरपूल के गोल को गलत तरीके से ‘ऑफसाइड’ देने या प्रीमियर लीग में गोल-लाइन टेक्नोलॉजी की खराबी के मामलों को भी नियमों का उल्लंघन नहीं माना गया।
दिसंबर 2023 में बेल्जियम प्रो लीग के दौरान जेनक और एंडरलेफ्ट के मैच में भी ऐसी स्थिति बनी थी। वहां रेफरी ने पेनल्टी के दौरान एनक्रोचमेंट (खिलाड़ियों का अंदर आना) को गलत तरीके से आंका था। हालांकि, बेल्जियम की खेल पंचाट अदालत ने बाद में उस मैच के परिणाम को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेफरी रोबोट नहीं होते हैं और फुटबॉल खिलाड़ियों की तरह उनसे भी गलतियां हो सकती हैं।
