पेप गार्डियोला ने बदल दी थी प्रेडो रोड्रिगेज की फुटबॉल करियर की दिशा
पूर्व बार्सिलोना फॉरवर्ड प्रेडो रोड्रिगेज ने उस पल को याद किया है जब पेप गार्डियोला ने उनके करियर को एक नई दिशा दी। एक महत्वाकांक्षी युवा खिलाड़ी से लेकर क्लब के इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक बनने तक का उनका सफर बेहद शानदार रहा है।
39 साल की उम्र में प्रेडो ने अपने असाधारण फुटबॉल करियर को अलविदा कह दिया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने स्पेन के लिए विश्व कप और यूरोपीय चैंपियनशिप जैसे बड़े खिताब जीते हैं। इन सफलताओं के बावजूद, प्रेडो का मानना है कि उनके करियर में निर्णायक मोड़ तब आया जब बार्सिलोना की रिजर्व टीम संरचना में अनिश्चितता के दौर में गार्डियोला ने उन्हें खुद को साबित करने का मौका दिया।
स्पोर्ट (SPORT) के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने बार्सिलोना के अपने सफर, फ्रैंक रिजकार्ड के मार्गदर्शन में अपनी पहली टीम में पदार्पण और गार्डियोला को एक विशेष मैनेजर बनाने वाले गुणों पर चर्चा की।
प्रेडो ने बताया कैसे गार्डियोला ने उन्हें बार्सिलोना में मौका दिया
प्रेडो टेनेरिफ़ से काफी महत्वाकांक्षा के साथ बार्सिलोना आए थे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनका फुटबॉल करियर उन्हें कितनी दूर ले जाएगा। जब गार्डियोला 2006 में उन्हें बार्सिलोना ‘सी’ में देख रहे थे, तब वह क्लब की युवा प्रणाली में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
उस दौर को याद करते हुए प्रेडो ने कहा, “मैं आज भी वैसा ही हूं: उत्साह और जोश से भरा एक युवा लड़का, जो इस शहर में यह साबित करने आया था कि वह फुटबॉल में करियर बना सकता है। लेकिन जैसा कि मैं हमेशा कहता हूं, आपकी उम्मीदें और भविष्य के लिए आपकी सोच का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता।”
प्रेडो ने स्वीकार किया कि बार्सिलोना में शामिल होने का मतलब ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं के बीच आना था जो पहले से ही सुर्खियों में थे। उन्होंने कहा, “मैं सीखने की तीव्र इच्छा के साथ आया था क्योंकि मैं टेनेरिफ़ की एक बहुत छोटी टीम से आया था, जहां मैंने अपने दोस्तों के साथ खेला था। वहीं, मैं सेस्क फैब्रेगास और पिक जैसे खिलाड़ियों के साथ खेल रहा था जो पहले से ही मशहूर थे।”
जब बार्सिलोना की ‘सी’ टीम के भंग होने की नौबत आई, तो गार्डियोला ने प्रेडो को अपने कार्यालय में बुलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौका उपलब्ध है, लेकिन प्रेडो को अपनी जगह खुद बनानी होगी।
प्रेडो ने बताया, “गार्डियोला ने मुझे अपने दफ्तर में बुलाया और कहा कि मैं उन खिलाड़ियों में से एक हूं जिन्हें मौका दिया जाएगा, लेकिन यह पूरी तरह से मुझ पर निर्भर है। उन्होंने इसे एक अंतिम अवसर की तरह पेश किया और मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। पेप गार्डियोला जैसे दिग्गज के नेतृत्व में प्रशिक्षण लेना मेरे लिए एक बड़ा अनुभव रहा।”
प्रेडो ने बताया गार्डियोला अन्य मैनेजरों से कैसे अलग हैं
प्रेडो के अनुसार, गार्डियोला की बारीकियों पर ध्यान देने की क्षमता, खेल की समझ और मैच के दौरान स्थितियों के अनुसार ढलने का कौशल उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।
उन्होंने कहा, “गार्डियोला अपने पूर्णतावाद (perfectionism), खेल को देखने के नजरिए और मुश्किल समय में समाधान खोजने की क्षमता के कारण अलग हैं। कई कोच उस स्तर तक नहीं पहुंच पाते। हालांकि कार्लो एंसेलोटी और जुर्गन क्लॉप जैसे टॉप कोच भी हैं, लेकिन पेप की विशेषज्ञता बिल्कुल अलग है।”
बार्सिलोना में पदार्पण और 2011 का चैंपियंस लीग फाइनल
प्रेडो को मुख्य टीम में मौका फ्रैंक रिजकार्ड के कार्यकाल में मिला। उन्होंने उन शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, “कैम्प नोउ में दर्शकों का उत्साह देखकर अच्छा लगा। मैं रोनाल्डिन्हो, एतूह, हेनरी, मेसी जैसे सितारों के साथ खेल रहा था, जो मेरे लिए अकल्पनीय था।”
जब उनसे उनके करियर का सबसे यादगार पल पूछा गया, तो प्रेडो ने 2011 में मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ वेम्बली में खेले गए चैंपियंस लीग फाइनल को चुना। उन्होंने मैच में गोल किया था और बार्सिलोना ने खिताब जीता था।
उन्होंने कहा, “बहुत सारे यादगार पल हैं, लेकिन वेम्बली का फाइनल और वह छह खिताबों (sextet) का सफर सबसे शानदार था। यह कड़ी मेहनत से भरा एक अनोखा सफर रहा है।”
