फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती, कई देशों ने समर्थन वापस लिया
फीफा (Fifa) अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो (Gianni Infantino) के लिए अपनी कुर्सी बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वर्ल्ड कप के हिस्से को निजी निवेशकों को बेचने की उनकी विफल कोशिश के कारण उन्हें भारी समर्थन खोना पड़ा है।
इंग्लैंड, वेल्स और अन्य यूरोपीय देशों ने मार्च 2027 में होने वाले पुन: चुनाव (re-election) के लिए जियानी इन्फेंटिनो को अपना समर्थन आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है। वहीं, यूईएफए (Uefa) ने जोर देकर कहा है कि फीफा प्रतियोगिताओं का उनका बहिष्कार अभी भी जारी है, ताकि उन्हें सत्ता से हटाया जा सके।
वैश्विक खिलाड़ी संघ, ‘फिफप्रो’ (Fifpro) ने भी इन्फेंटिनो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और एक विस्फोटक बयान में उन पर “राष्ट्रपति की शक्तियों का गहरा दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, इन्फेंटिनो के सहयोगी भी सामने आ रहे हैं। मैक्सिको और अर्जेंटीना ने अफ्रीकी फुटबॉल शासी निकाय (Caf) के साथ मिलकर दबाव झेल रहे अध्यक्ष के लिए अपना समर्थन फिर से जाहिर किया है।
जैसे-जैसे समर्थन और विरोध का सिलसिला बढ़ रहा है, आइए जानते हैं कि किन देशों और परिसंघों ने इन्फेंटिनो के खिलाफ या उनके पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया है।
इन्फेंटिनो का समर्थन किसने वापस लिया है?
यूईएफए (Uefa) 🇪🇺
यूरोप के शासी निकाय यूईएफए ने इन्फेंटिनो के नेतृत्व का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्ल्ड कप को निजी हाथों में सौंपने की योजना रद्द होने के बावजूद, फीफा प्रतियोगिताओं का उनका बहिष्कार जारी रहेगा। यूईएफए का तर्क है कि इस बात की कोई “गारंटी” नहीं है कि खेल को खराब करने वाली इस तरह की निजीकरण की कोशिशें दोबारा नहीं होंगी। हालांकि, फ्रांसीसी फुटबॉल महासंघ ने बीबीसी स्पोर्ट को बताया है कि वे अगले महीने होने वाले अंडर-20 महिला विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करना जारी रखेंगे।
इंग्लैंड 🏴
इंग्लिश एफए उन यूरोपीय संघों में शामिल है जिन्होंने फीफा को पत्र लिखकर 2027 के चुनाव में इन्फेंटिनो के लिए अपना समर्थन वापस ले लिया है। बुधवार रात को भेजे गए इन्फेंटिनो के माफीनामे का एफए पर कोई असर नहीं पड़ा। उनका कहना है कि वे इस योजना से जुड़ी “प्रक्रिया और शासन की कमी” को लेकर चिंतित हैं।
वेल्स 🏴
फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ वेल्स (FAW) ने सबसे पहले इन्फेंटिनो से समर्थन वापस लेने का पत्र भेजा था। उनके बयान में कहा गया, “अच्छे शासन, प्रक्रिया, नेतृत्व और मूल्यों में हालिया विफलता ने हमें इस स्थिति में ला दिया है कि श्री इन्फेंटिनो ने विश्व फुटबॉल की बागडोर संभालने का विश्वास खो दिया है।”
फिनलैंड 🇫🇮, सर्बिया 🇷🇸, स्वीडन 🇸🇪, क्रोएशिया 🇭🇷, अल्बानिया 🇦🇱 और ग्रीस 🇬🇷
इन देशों के फुटबॉल महासंघों ने भी आधिकारिक तौर पर फीफा को पत्र लिखकर अपनी असहमति और समर्थन वापसी की पुष्टि की है। विशेष रूप से स्वीडन और सर्बिया ने अपने बयानों में शासन, पारदर्शिता और प्रबंधन में बार-बार होने वाली कमियों को मुख्य कारण बताया है।
इन्फेंटिनो का विरोध करने वाले अन्य निकाय
कॉन्काकैफ (Concacaf) 🌎
उत्तरी अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के इस निकाय ने भी इन्फेंटिनो के खिलाफ रुख अपना लिया है। फीफा द्वारा बिना सलाह-मशविरा किए वर्ल्ड कप को बेचने की योजना से वे काफी नाराज थे। कॉन्काकैफ अध्यक्ष विक्टर मोंटाग्लियानी को मार्च में होने वाले चुनाव में इन्फेंटिनो को चुनौती देने वाले मुख्य दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
एएफसी (AFC) 🌏
एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने भी फीफा की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रस्ताव को खारिज करते हुए फीफा से अपने शासन की “तत्काल समीक्षा” करने की मांग की है।
नॉर्वे 🇳🇴 और नीदरलैंड्स 🇳🇱
नॉर्वे के फुटबॉल महासंघ ने इन्फेंटिनो से इस्तीफा देने की मांग की है। उनकी अध्यक्ष लिसे क्लावेनेस ने कहा है कि अब विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है। वहीं, नीदरलैंड्स के फुटबॉल संघ (KNVB) ने भी नेतृत्व के प्रति अविश्वास जाहिर किया है।
जॉर्डन 🇯🇴
जॉर्डन ने फीफा पर ब्लैकमेल का आरोप लगाया है। जॉर्डन फुटबॉल संघ ने स्पष्ट किया है कि वे न तो अध्यक्ष का समर्थन करेंगे और न ही उन्हें वोट देंगे।
इन्फेंटिनो का समर्थन करने वाले कौन हैं?
कैफ (Caf) 🌍
अफ्रीकी फुटबॉल का शासी निकाय कैफ सर्वसम्मति से इन्फेंटिनो के समर्थन में खड़ा है। इसके 54 सदस्य देश फीफा के कुल 211 सदस्यों में से एक चौथाई से अधिक हैं। कैफ अध्यक्ष पैट्रिस मोटसेपे ने कहा कि वे शासन और पारदर्शिता के लिए फीफा के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अर्जेंटीना 🇦🇷, मैक्सिको 🇲🇽, पराग्वे 🇵🇾, कतर 🇶🇦, श्रीलंका 🇱🇰, कुवैत 🇰🇼, लेबनान 🇱🇧, इंडोनेशिया 🇮🇩, फिलीपींस 🇵🇭, भूटान 🇧🇹 और मोरक्को 🇲🇦
इन देशों के फुटबॉल संघों ने इन्फेंटिनो के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। कई देशों ने कहा है कि वे फीफा की विकासात्मक परियोजनाओं और इन्फेंटिनो के नेतृत्व में खेल की प्रगति से संतुष्ट हैं। मोरक्को में ही इन्फेंटिनो की संकटकालीन बैठक हुई थी, और वहां के फुटबॉल संघ ने उन्हें अपना एक वफादार सहयोगी बताया है।
कांगो (DR Congo) 🇨🇩, नाइजीरिया 🇳🇬, गाम्बिया 🇬🇲, जिबूती 🇩🇯
अफ्रीका के कई और देशों ने भी खुलकर इन्फेंटिनो का साथ दिया है। गाम्बिया के फुटबॉल प्रमुख ने तो यहां तक कहा कि इन्फेंटिनो “यहीं रहने के लिए हैं” और उन्हें फिर से चुनाव जिताने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के खेल मंत्री गयटन मैकेंजी ने भी सोशल मीडिया पर अफ्रीका को आगाह किया कि वे इन्फेंटिनो के खिलाफ इस सार्वजनिक हमले में शामिल न हों।
स्थिति अभी स्पष्ट नहीं:
ओशिनिया फुटबॉल परिसंघ (OFC) ने अभी तक अपना आधिकारिक रुख सार्वजनिक नहीं किया है, हालांकि उनका सबसे बड़ा देश न्यूजीलैंड इन्फेंटिनो के प्रस्ताव के खिलाफ है। वहीं, कॉनमेबोल (Conmebol) ने फीफा की प्रक्रिया पर चिंता जताई है, लेकिन इन्फेंटिनो के भविष्य पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है।
