2026 वर्ल्ड कप निष्पक्ष है, खिलाड़ी निको ओ’रैली ने जताई सहमति
2026 वर्ल्ड कप की शुरुआत से ही यह टूर्नामेंट विवादों में घिरा रहा है, क्योंकि निर्णयों में राजनीति का दखल लगातार बना हुआ है। कई विवादास्पद रेफरी फैसलों के कारण यह टूर्नामेंट अब अटकलों और चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
अर्जेंटीना द्वारा मिस्र को बाहर किए जाने के बाद स्थिति इतनी उलझ गई कि प्रशंसकों ने ऑनलाइन ‘डिटेक्टिव’ बनकर पूरे टूर्नामेंट को ही ‘स्क्रिप्टेड’ करार दे दिया। प्रशंसकों का मानना था कि कुछ विवादास्पद फैसलों के पीछे खेल में हेरफेर की गई है।
इन आरोपों से इनकार करते हुए और पारदर्शिता साबित करने के लिए फीफा ने आनन-फानन में अपने वीएआर (VAR) अधिकारियों को गुप्त कमरों से निकालकर सीधे स्टेडियमों में तैनात कर दिया। दरअसल, रेफरी को दूरस्थ बंकरों में छिपाकर रखने के फैसले ने दुनिया भर में यह धारणा बना दी थी कि खेलों में धांधली हो रही है।
इंग्लैंड के पूर्व रेफरी प्रमुख कीथ हैकेट ने हालांकि इन निर्णयों की निष्पक्षता का समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ल्ड कप में मैचों में कोई फिक्सिंग नहीं हुई है। इसी बीच, खिलाड़ी निको ओ’रैली ने भी टूर्नामेंट पर अपना भरोसा जताया है।
नार्वे के खिलाफ इंग्लैंड के मैच से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए निको ओ’रैली ने टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर अपनी बात रखी। जब उनसे सवाल किया गया कि “क्या यह एक निष्पक्ष टूर्नामेंट है, निको?”, तो उन्होंने सीधे तौर पर “हाँ” में जवाब दिया।
यह विवाद उस घटना के बाद आया है जिसमें जैरेल क्वानसा को रेड कार्ड दिखाकर दो मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। एफए (FA) का तर्क था कि वीएआर ने सही प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, लेकिन इस अपील को खारिज कर दिया गया।
