इंग्लैंड के विश्व कप विजेता नॉबी स्टाइल्स की मौत के मामले में जांच के आदेश
इंग्लैंड के विश्व कप विजेता फुटबॉलर नॉबी स्टाइल्स की मौत के मामले में एक अदालत ने शुक्रवार को जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट को बताया गया कि स्टाइल्स की मौत ‘ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी’ के कारण हुई थी।
78 वर्षीय नॉबी स्टाइल्स मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व खिलाड़ी थे और उन्होंने 1966 में विश्व कप जीतने वाली इंग्लैंड की टीम का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी मृत्यु ‘क्रोनिक ट्रॉमेटिक एन्सेफैलोपैथी’ (CTE) नामक मस्तिष्क की चोट के साथ हुई। माना जाता है कि फुटबॉल को बार-बार हेडर करने (सिर से मारने) के कारण लगी चोटों से यह स्थिति उत्पन्न होती है।
ग्रेटर मैनचेस्टर साउथ के एरिया कोरोनर क्रिस मॉरिस ने स्टॉकपोर्ट कोरोनर कोर्ट में कहा कि एक मस्तिष्क विशेषज्ञ ने नमूनों और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की है। इस चोट के कारण मामले की पूरी जांच आवश्यक है। नॉबी स्टाइल्स एक बेहतरीन डिफेंसिव मिडफील्डर थे। उन्होंने इंग्लैंड के लिए 28 मैच खेले और मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए लगभग 400 मैच खेले।
लंबी बीमारी के बाद अक्टूबर 2020 में उनका निधन हो गया। उनके परिवार के साथ-साथ अन्य दिवंगत फुटबॉल खिलाड़ियों के परिजन भी खेल संस्थाओं से मांग कर रहे हैं कि वे पूर्व खिलाड़ियों को खेल के दौरान लगी चोटों से उबरने में मदद करें। कोरोनर मॉरिस ने कहा कि मौत के कारण, विशेष रूप से ‘ट्रॉमेटिक इंजरी’ को देखते हुए उन्हें यकीन है कि मिस्टर स्टाइल्स की मौत की जांच जरूरी है। यह जांच 15 जुलाई को उसी अदालत में की जाएगी।
स्टाइल्स के बेटे जॉन ने पहले कहा था कि फुटबॉल ने उनके पिता की जान ले ली। जॉन उन पूर्व फुटबॉल खिलाड़ियों और उनके परिवारों में शामिल हैं, जो इंग्लैंड के फुटबॉल एसोसिएशन, वेल्स के फुटबॉल एसोसिएशन और इंग्लिश फुटबॉल लीग पर मुकदमा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ये संस्थाएं पूर्व खिलाड़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरत रही हैं।
पीड़ित परिवारों के वकीलों का कहना है कि फुटबॉल अधिकारियों को यह पता था, या पता होना चाहिए था कि प्रशिक्षण और मैचों के दौरान बार-बार गेंद को सिर से मारने से मस्तिष्क की चोटें लग सकती हैं। हालांकि, इस साल मार्च में फुटबॉल एसोसिएशन के वकीलों ने हाई कोर्ट में तर्क दिया कि विज्ञान द्वारा यह साबित नहीं हुआ है कि गेंद को हेडर करने या ‘कभी-कभार’ होने वाले झटके से स्थायी मस्तिष्क क्षति हो सकती है।
इससे पहले जनवरी में लीड्स, मैनचेस्टर यूनाइटेड और स्कॉटलैंड के पूर्व डिफेंडर गॉर्डन मैकक्वीन की मौत की जांच में पाया गया था कि गेंद को हेडर करने से उनके मस्तिष्क की चोट में योगदान दिया होगा, जो उनकी मौत का एक कारण बनी। मैकक्वीन भी क्रोनिक ट्रॉमेटिक एन्सेफैलोपैथी (CTE) से पीड़ित थे।
मैकक्वीन की बेटी और टीवी प्रस्तोता हेली मैकक्वीन ने कहा कि इंग्लैंड की 1966 की विश्व कप विजेता टीम के खिलाड़ी अब लगभग खत्म हो चुके हैं। फाइनल में हैट्रिक लगाने वाले ज्योफ हर्स्ट उस टीम के एकमात्र जीवित सदस्य बचे हैं। फुटबॉल एसोसिएशन वर्तमान में 11 साल से कम उम्र के बच्चों के फुटबॉल में गेंद को सिर से मारने (हेडिंग) पर धीरे-धीरे रोक लगा रहा है।
