यूरो ’96 की यादों के साथ वेम्बली लौट रही चेक गणराज्य की टीम
चेक गणराज्य की टीम अंतरराष्ट्रीय ब्रेक के दौरान एक बार फिर उत्तरी लंदन के उस मैदान पर वापसी करेगी, जिसने उनके इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक देखा था। वे एक बार फिर वेम्बली के मैदान पर उतरने के लिए तैयार हैं। नेशंस लीग ग्रुप A3 में चेक गणराज्य का सामना इंग्लैंड से दो बार होगा—पहला मुकाबला 29 सितंबर को प्राग में और दूसरा 6 अक्टूबर को लंदन में खेला जाएगा।
यद्यपि चेक टीम पुराने वेम्बली स्टेडियम के ‘ट्विन टावर्स’ के नीचे जर्मनी से यूरो ’96 का फाइनल हार गई थी, लेकिन यह दौरा इंग्लैंड में बिताई गई उस यादगार गर्मियों की 30वीं वर्षगांठ का प्रतीक है।
चेक गणराज्य के लिए वो ‘करीबी’ पल
यूरो ’96 चेकस्लोवाकिया के अलग होकर चेक गणराज्य और स्लोवाकिया बनने के बाद पहला यूरोपीय चैंपियनशिप टूर्नामेंट था। उस समय किसी को उम्मीद नहीं थी कि चेक टीम टूर्नामेंट में कोई खास प्रभाव डाल पाएगी, यहां तक कि खुद खिलाड़ियों को भी ऐसा नहीं लगा था। टीम को कमजोर माना जा रहा था और अधिकांश खिलाड़ी घरेलू लीग में खेल रहे थे। कई खिलाड़ियों ने ग्रुप चरण के ठीक बाद के लिए छुट्टियां बुक कर ली थीं, और व्लादिमीर स्मिचर की शादी भी उसी दौरान होनी थी।
मिडफील्डर पैट्रिक बर्गर ने बीबीसी स्पोर्टिंग विटनेस पॉडकास्ट में बताया कि उनके तत्कालीन बोरुसिया डॉर्टमुंड टीम के साथी जुर्गन कोहलर को यह भी नहीं पता था कि चेक टीम यूरो में खेल रही है। बर्गर ने कहा, “कोहलर ने मुझसे पूछा कि गर्मियों के लिए मेरी क्या योजनाएं हैं। मैंने कहा ‘मैं यूरो जा रहा हूं’ और उन्होंने पूछा ‘मैच देखने?’ मैंने जवाब दिया ‘नहीं, हम ग्रुप स्टेज के पहले मैच में आप लोगों के खिलाफ खेलेंगे और फिर हम फाइनल में खेलेंगे’—और वे हंसने लगे।”
चेक टीम अपना शुरुआती मैच ओल्ड ट्रैफर्ड में जर्मनी से 2-0 से हारी, लेकिन फिर एनफील्ड में इटली को 2-1 से हरा दिया। रूस के खिलाफ 3-3 से ड्रा मैच में स्मिचर के आखिरी समय में किए गए गोल ने टीम को आगे पहुंचाया। बर्गर ने याद करते हुए कहा, “हमें लगा कि हम अभी भी दौड़ में हैं, लेकिन हमें दूसरे परिणाम की जानकारी नहीं थी। अंतिम सीटी बजने के बाद हमें अहसास हुआ कि हमने क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है।”
क्वार्टर फाइनल में कारेल पोबोर्स्की ने पुर्तगाल के खिलाफ एक यादगार गोल किया और टीम 1-0 से जीत गई। इसके बाद सेमीफाइनल में फ्रांस के खिलाफ गोलरहित ड्रा के बाद चेक टीम ने पेनल्टी शूटआउट में 6-5 से जीत दर्ज की। बर्गर ने कहा, “हम जो कुछ हुआ उस पर यकीन नहीं कर पा रहे थे। यह एक अद्भुत अहसास था, देश के लिए एक अविस्मरणीय पल।”
फाइनल से दो दिन पहले स्मिचर शादी करने प्राग लौटे थे, लेकिन उन्हें उसी दिन वापस इंग्लैंड आना पड़ा। फाइनल में चेक गणराज्य का सामना वेम्बली में जर्मनी से हुआ, जहां बर्गर की पेनल्टी से वे 59वें मिनट तक आगे थे। हालांकि, 14 मिनट बाद ओलिवर बियहॉफ ने बराबरी का गोल किया और फिर प्रमुख टूर्नामेंट के फाइनल में पहला ‘गोल्डन गोल’ दागकर जर्मनी को जीत दिलाई।
बर्गर ने कहा, “यह किस्मत में नहीं था। मुझे रजत पदक मिला जो हमारे लिए सोने जैसा था क्योंकि इसने हमारे और अगली पीढ़ी के लिए दरवाजे खोल दिए। मुझे कोई पछतावा नहीं है।”
आगे क्या हुआ
चेकस्लोवाकिया के रूप में, टीम ने 1976 में यूरोपीय चैंपियनशिप जीती थी। अलग राष्ट्र के रूप में चेक गणराज्य के लिए 1996 का टूर्नामेंट आखिरी बार था जब वे फाइनल तक पहुंचे। हालांकि, 2004 के सेमीफाइनल और 2012 व 2021 के क्वार्टर फाइनल के साथ टीम ने कई यादगार प्रदर्शन किए हैं।
प्राग स्थित फुटबॉल पत्रकार ओंद्रेज ज़लामा के अनुसार, 2004 की टीम 1996 से भी बेहतर थी। उन्होंने कहा, “2006 और 2026 के बीच टीम के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी रही। हमारे पास पहले जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं हैं और न ही शीर्ष टीमों में खेलने वाले पर्याप्त खिलाड़ी हैं।”
अब स्पेनिश कोच सांती डेनिया के नेतृत्व में चेक टीम एक नए युग की शुरुआत कर रही है। वे राष्ट्रीय टीम के इतिहास में पहले विदेशी कोच हैं। डेनिया और उनकी टीम के लिए नेशंस लीग के मैच अपनी पहचान बनाने का एक शानदार मौका हैं।
