मैनचेस्टर सिटी पर लगे वित्तीय नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अंग्रेजी शब्द ‘sham’ (छल) का अर्थ होता है धोखे से किसी को गुमराह करना या दिखावा करना। मंगलवार को जारी स्वतंत्र आयोग के फैसले में यह शब्द आठ बार इस्तेमाल किया गया है। आयोग ने मैनचेस्टर सिटी को वित्तीय नियमों के गंभीर उल्लंघन और जांच में सहयोग न करने के आरोपों में दोषी पाया है।
40 पन्नों की यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे क्लब के मालिक ‘अबू धाबी यूनाइटेड ग्रुप’ को 2009-10 सीजन से ही यह पता था कि यदि क्लब को उनके मनचाहे स्तर तक पहुँचना है, तो उन्हें भारी खर्च करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, सिटी ने नौ सीजन तक प्रायोजन (sponsorship) आय बढ़ाने का एक तरीका ढूंढ निकाला था।
क्या है ‘डिस्गाइज्ड फंडिंग स्कीम’?
मैनचेस्टर सिटी के खिलाफ प्रमुख आरोपों में ‘डिस्गाइज्ड फंडिंग स्कीम’ (छिपी हुई फंडिंग योजना) शामिल है। इस योजना के जरिए क्लब ने 830 मिलियन पाउंड से अधिक की प्रायोजन राशि और 90 मिलियन पाउंड के खर्चों को छिपाया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रायोजन सौदे दो हिस्सों में बंटे थे: एक बेस फीस और दूसरी टैग्ड राशि। प्रायोजक केवल बेस फीस देते थे, जबकि बाकी की भारी-भरकम राशि क्लब के मालिक चुकाते थे। इसका मकसद वित्तीय नियामकों को गुमराह करना था।
नए मालिकों के लिए शुरुआत से ही चुनौती
2008 में मैनचेस्टर सिटी को खरीदने वाले अबू धाबी के निवेशकों के लिए 2009-10 सीजन से ही मुश्किलें साफ थीं। वे क्लब को शीर्ष पर ले जाना चाहते थे, जिसके लिए भारी निवेश की जरूरत थी। उस समय क्लब का घाटा प्रीमियर लीग के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला था। इसे रोकने के लिए उन्होंने प्रायोजन से होने वाली आय को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना शुरू किया।
प्रोजेक्ट लॉन्गबो और फोर्डहम अरेंजमेंट
2012 में सिटी ने ‘प्रोजेक्ट लॉन्गबो’ लॉन्च किया। हालांकि, इसमें कुछ कदम वास्तविक थे, लेकिन ‘फोर्डहम अरेंजमेंट’ को रिपोर्ट में महज एक दिखावा बताया गया है। इसके जरिए क्लब के मालिकों ने खिलाड़ी के इमेज राइट्स के नाम पर फंड क्लब में डाला, जिसे परिचालन आय (operating income) के रूप में गलत तरीके से दिखाया गया।
खिलाड़ियों और प्रबंधकों के खर्च छुपाने का तरीका
क्लब ने महंगे अनुबंधों और वेतन को अपनी किताबों से बाहर रखने के लिए भी हथकंडे अपनाए। इन भुगतानों को ‘परामर्श समझौतों’ (consultancy agreements) के रूप में रिकॉर्ड किया गया, जबकि वास्तविकता में ये भुगतान मालिकों द्वारा किए जा रहे थे। इस तरह से 8.866 मिलियन, 7.4 मिलियन और 0.5 मिलियन पाउंड के भुगतान किए गए।
जांच के दौरान गवाहों ने बोला झूठ
रिपोर्ट में कहा गया है कि मैनचेस्टर सिटी ने प्रीमियर लीग की जांच में बाधा डालने का प्रयास किया। क्लब द्वारा पेश किए गए 24 गवाहों में से कई ने ऐसी जानकारी दी जो गलत थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि क्लब के वार्षिक खाते वित्तीय स्थिति की सही तस्वीर पेश नहीं करते थे। आयोग ने कहा कि सिटी ने ‘पूरी ईमानदारी’ के साथ काम नहीं किया और प्रीमियर लीग के प्रति सहयोग के अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया।
वित्तीय गड़बड़ी का ब्यौरा (2009-10 से 2017-18):
- प्रायोजन: आय को 830 मिलियन पाउंड से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।
- अनुबंध और इमेज राइट्स: 8.866 मिलियन, 7.4 मिलियन और 0.5 मिलियन पाउंड के खर्चों को गलत तरीके से बाहर रखा गया।
- फोर्डहम अरेंजमेंट: 24.5 मिलियन पाउंड को गलत तरीके से परिचालन आय के रूप में दर्ज किया गया और 49.414 मिलियन पाउंड के खर्चों को छुपाया गया।
कुल मिलाकर, इन आंकड़ों के माध्यम से 920.68 मिलियन पाउंड की वित्तीय हेरफेर सामने आई है। मैनचेस्टर सिटी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रीमियर लीग ने उनके प्रायोजन समझौतों को गलत समझा है, जिसे आयोग ने पूरी तरह से नकार दिया है।
