मैनचेस्टर सिटी पर लगे वित्तीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों से फुटबॉल जगत में हलचल
मैनचेस्टर सिटी के एतिहाद स्टेडियम के बाहर सर्जियो एगुएरो की एक चमकदार चांदी की मूर्ति लगी है। यह मूर्ति उस ऐतिहासिक गोल के जश्न को दर्शाती है, जिसने क्लब को अपना पहला प्रीमियर लीग खिताब दिलाया था। यह 2011-12 सीज़न के अंतिम क्षणों में मैनचेस्टर यूनाइटेड से ट्रॉफी छीनने वाले इंग्लिश लीग फुटबॉल इतिहास के सबसे प्रसिद्ध गोल की अमर गाथा है।
लेकिन अगर वह गोल कभी हुआ ही न होता? अगर एगुएरो ने कभी इस क्लब के लिए खेला ही न होता? क्या होता यदि सिटी ने फुटबॉल के वित्तीय नियमों का पालन करने के बजाय, उन्हें जानबूझकर एक “गुप्त फंडिंग योजना” के माध्यम से तोड़ने का रास्ता न चुना होता?
क्लब को उन आरोपों में दोषी पाया गया है जो प्रीमियर लीग ने साढ़े तीन साल पहले लगाए थे। इस खुलासे ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों के बीच 2009 से 2018 के दौरान सिटी की उपलब्धियों की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस अवधि में क्लब इंग्लिश फुटबॉल का सबसे सफल क्लब बना और खुद को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर स्थापित किया।
कुछ प्रशंसक इसे ‘एस्टरिस्क एरा’ (तारांकित युग) कह रहे हैं। ऐसी संभावना है कि सिटी से वे सम्मान वापस लिए जा सकते हैं जो उन्होंने उस अवधि के दौरान अर्जित किए थे। कुछ क्लब संभावित वित्तीय मुआवजे के लिए कानूनी सलाह भी ले रहे हैं।
नियमों के उल्लंघन के दौर में मैन सिटी का ट्रांसफर खर्च कितना शक्तिशाली था?
मैनचेस्टर सिटी ने 2009 की गर्मियों और जनवरी 2018 के बीच ट्रांसफर विंडो में नए खिलाड़ियों पर लगभग 1.2 बिलियन पाउंड खर्च किए। उस दौरान, क्लब ने सात प्रमुख ट्राफियां जीतीं, जबकि 1970 के बाद से उसने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की थी।
आयोग ने पाया कि क्लब ने प्रायोजन आय की आड़ में गलत तरीके से भारी धनराशि पंप की थी। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि यदि सिटी ने अपने वित्तीय खातों में हेरफेर न किया होता, तो वे इतनी बड़ी संख्या और गुणवत्ता वाले खिलाड़ियों को नहीं खरीद सकते थे। यदि सिटी की वित्तीय शक्ति को उस 830 मिलियन पाउंड से कम कर दिया जाता, जिसे आयोग ने गलत तरीके से खातों में शामिल बताया है, तो उनका ट्रांसफर खर्च काफी कम होता। इसका मतलब संभवतः यह होता कि एगुएरो, डेविड सिल्वा, या केविन डी ब्रुने जैसे खिलाड़ी वहां न होते।
फुटबॉल प्रशंसकों और भविष्य के लिए इसका क्या मतलब है?
सिटी के पास अपील करने के लिए शुक्रवार तक का समय है। यदि अपील असफल रहती है, तो क्लब को किसी न किसी प्रकार का दंड दिया जाएगा। फिलहाल, मैनचेस्टर सिटी के प्रशंसक और अन्य क्लबों के समर्थक यह नहीं जानते कि वे जो फुटबॉल देख रहे हैं वह ‘वास्तविक’ है या नहीं।
क्या सिटी वास्तव में लीग में शीर्ष पर है, या बाद में उनके अंक काटे जाएंगे? क्या उन्हें प्रीमियर लीग से बाहर निकाला जाएगा? क्या ये नियम उल्लंघन प्रीमियर लीग की लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाएंगे? इन सवालों के जवाब ही विश्व के सबसे लोकप्रिय खेल की सबसे बड़ी लीग का भविष्य तय करेंगे।
