फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंची टॉप चार टीमें, नई ड्रॉ व्यवस्था का दिखा असर
फीफा वर्ल्ड रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज चार टीमें पहली बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंची हैं। स्पेन (1), अर्जेंटीना (2), फ्रांस (3) और इंग्लैंड (4) की इस सफलता में फीफा द्वारा 2026 वर्ल्ड कप के लिए किए गए बदलावों ने अहम भूमिका निभाई है।
टूर्नामेंट के ड्रॉ में इन चारों टीमों को अलग-अलग क्वाड्रंट में रखा गया था, ताकि वे सेमीफाइनल से पहले एक-दूसरे का सामना न कर सकें। इस स्थिति तक पहुंचने के लिए इन सभी टीमों को अपने-अपने ग्रुप में जीत हासिल करनी थी, जिसमें वे सफल रहीं। इस ड्रॉ के कारण स्पेन और अर्जेंटीना फाइनल से पहले आपस में नहीं भिड़ सकती थीं। वहीं, इंग्लैंड और फ्रांस को नॉकआउट चरण के विपरीत दिशाओं में रखा गया था, जिससे वे सेमीफाइनल में स्पेन या अर्जेंटीना से टकरा सकती थीं।
फीफा ने इस बदलाव को ‘प्रतिस्पर्धी संतुलन’ सुनिश्चित करने का नाम दिया है, ताकि सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग रास्ते तैयार किए जा सकें। अब मंगलवार को फ्रांस का मुकाबला स्पेन से और बुधवार को इंग्लैंड का मुकाबला अर्जेंटीना से होगा। विंबलडन और नए चैंपियंस लीग फॉर्मेट में भी इसी तरह का तरीका अपनाया जाता है, जहां वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों या टीमों को अलग-अलग रखा जाता है।
फीफा रैंकिंग की शुरुआत 1994 में हुई थी, लेकिन उस साल के टूर्नामेंट में इनका इस्तेमाल नहीं किया गया था। इससे पहले बेल्जियम (2022), जर्मनी (2018), स्पेन (2014), इटली (2010) और फ्रांस (2002) जैसी शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थीं। 1998 के बाद से किसी भी वर्ल्ड कप में सभी शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाई थीं।
विश्लेषण – फीफा ने इस बदलाव को लेकर पारदर्शिता बरती
जब फीफा अधिकारियों ने इस वर्ल्ड कप के लिए ड्रॉ प्रक्रिया बदली, तो उन्होंने पूरी पारदर्शिता के साथ ऐसा किया। फुटबॉल की वैश्विक संस्था का कहना था कि वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शीर्ष रैंकिंग वाले चार देश नॉकआउट राउंड में जल्दी न भिड़ें, ताकि बड़े मुकाबले टूर्नामेंट के अंतिम चरणों के लिए सुरक्षित रहें।
पहले यह समस्या नहीं थी। 32 टीमों वाले वर्ल्ड कप में ग्रुप विजेता अंतिम 16 में आपस में नहीं भिड़ सकते थे। वर्ष 2010 को छोड़कर, जब नीदरलैंड ने क्वार्टर फाइनल में ब्राजील को 2-1 से हराया था, शीर्ष चार टीमों के सेमीफाइनल से पहले मिलने की घटनाएं नहीं हुई थीं। 48 टीमों वाले वर्ल्ड कप में एक अतिरिक्त नॉकआउट राउंड के कारण ग्रुप विजेताओं का जल्दी आमना-सामना होना लगभग तय हो गया था। इस गर्मी के अंतिम 16 दौर में संयुक्त राज्य अमेरिका का मुकाबला बेल्जियम से, इंग्लैंड का मेक्सिको से और स्विट्जरलैंड का कोलंबिया से हुआ था।
इसलिए फीफा ने महसूस किया कि 2026 के विस्तारित फॉर्मेट के कारण इसमें बदलाव जरूरी है। फीफा यह रोकना चाहता था कि कोई बड़ा मुकाबला जल्दी न हो जाए और किसी एक शीर्ष टीम को बाहर न होना पड़े। इसी रैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल पिछले साल क्लब वर्ल्ड कप में भी किया गया था, हालांकि उस समय चार शीर्ष वरीयताओं में से केवल रियल मैड्रिड ही सेमीफाइनल में पहुंच पाई थी। इस बार, यह व्यवस्था फीफा की योजना के अनुसार पूरी तरह सफल रही है।
