फ्रांस फुटबॉल टीम की नई शुरुआत: जिनेदिन जिदान ने संभाली कोच की कमान
फ्रांस की फुटबॉल टीम शुक्रवार को जब तुर्की के खिलाफ मैदान में उतरेगी, तो 14 वर्षों में पहली बार टीम को एक नया कोच मार्गदर्शन देता नजर आएगा। विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के बाद डिडिएर डेशम्प्स की जगह जिनेदिन जिदान को कोच नियुक्त किया गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति की चर्चा काफी पहले से ही शुरू हो गई थी, विशेषकर इंग्लैंड के खिलाफ फ्रांस की हार के बाद से यह एक खुला रहस्य बन गया था।
रियल मैड्रिड के पूर्व कोच और फुटबॉल के दिग्गज जिदान के साथ फ्रांसीसी फुटबॉल अधिकारियों की बातचीत फरवरी 2025 में ही शुरू हो गई थी। यह चर्चा डेशम्प्स द्वारा 2026 विश्व कप के बाद इस्तीफा देने की घोषणा के कुछ सप्ताह बाद हुई थी। पेरिस में अपनी नियुक्ति के बाद जिदान ने कहा कि वे लंबे समय से इस मौके का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में मुझे कई प्रस्ताव मिले, लेकिन मैंने उन सभी को ठुकरा दिया। राष्ट्रीय टीम ही एकमात्र ऐसी चीज थी जिसे मैं चाहता था।”
अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिदान ने टीम की बागडोर संभालने पर उत्साह तो जाहिर किया, लेकिन अपनी कार्यशैली के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया। जब उनसे किलियन एम्बाप्पे की कप्तानी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “फिलहाल उनके लिए आराम करना सबसे जरूरी है, हम सितंबर में इस पर बात करेंगे।” एम्बाप्पे ने स्पेनिश समाचार पत्र ‘एएस’ से बात करते हुए कहा कि रियल मैड्रिड के पूर्व स्टार का राष्ट्रीय टीम का कोच बनना एक फिल्म जैसा अनुभव है।
अपनी खेल रणनीति के बारे में जिदान ने कहा कि वह अभी खिलाड़ियों से मुलाकात करेंगे और अपनी योजनाएं समझाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि वे चीजें कुछ अलग ढंग से करेंगे। उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय ब्रेक के लिए पांच नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व कोच डेशम्प्स के काम की सराहना करते हुए कहा कि वे पूरी तरह से बदलाव नहीं करेंगे और काम में निरंतरता बनाए रखेंगे।
खिलाड़ी के रूप में जिदान का सफर
2006 में संन्यास लेने वाले जिदान अपनी पीढ़ी के सबसे बेहतरीन आक्रामक मिडफील्डरों में से एक थे। उन्होंने जुवेंटस और रियल मैड्रिड के साथ कई लीग खिताब जीते और 1998 विश्व कप तथा यूरो 2000 में फ्रांस की जीत में अहम भूमिका निभाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने केन्स और बोर्डो के लिए भी खेला। जुवेंटस के बाद वे रिकॉर्ड £45.8 मिलियन की फीस पर रियल मैड्रिड में शामिल हुए थे। उनके करियर का अंत 2006 विश्व कप के फाइनल में इटली के मार्को माटेराजी को सिर मारने के कारण मिली रेड कार्ड के साथ हुआ था।
कोच के रूप में नई चुनौतियां
जिदान और डेशम्प्स दोनों ही 1998 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं। जिदान ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में वे नंबर 10 की भूमिका में थे और उन्हें खेल में गोल करना प्रेरित करता है। 54 वर्षीय जिदान के लिए राष्ट्रीय टीम का प्रबंधन करना एक नया अनुभव है, लेकिन वे इसे लेकर आश्वस्त हैं। फैंस और खिलाड़ियों ने भी उनका स्वागत सकारात्मक रूप से किया है। एम्बाप्पे ने इंस्टाग्राम पर उनके लिए “वेलकम होम” लिखकर स्वागत किया।
फ्रांस के पूर्व खिलाड़ी बिक्सेंते लिजाराजू ने कहा, “यह फ्रांसीसी फुटबॉल के लिए एक बड़ा दिन है। रियल मैड्रिड में बड़े खिलाड़ियों और अहंकार को संभालने के बाद, वे टीम के प्रबंधन के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।”
अब आगामी नेशंस लीग के चार मैचों में जिदान के प्रबंधन कौशल की पहली परीक्षा होगी। तुर्की के बाद फ्रांस को बेल्जियम के खिलाफ दो और इटली के खिलाफ एक मैच खेलना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जिदान अपनी इस नई भूमिका में किस तरह के सामरिक बदलाव लाते हैं।
