विश्व कप में इंग्लैंड का प्रदर्शन: ऐतिहासिक उपलब्धि या एक और चूक?
शनिवार को फ्रांस के खिलाफ ‘ब्रोंज फाइनल’ में 6-4 की रोमांचक जीत के साथ इंग्लैंड की पुरुष टीम ने विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। पिछले 60 वर्षों में यह इंग्लैंड की किसी भी विश्व कप में सबसे बड़ी उपलब्धि है। टीम ने चौथे स्थान की रैंकिंग के साथ टूर्नामेंट में प्रवेश किया और तीसरे स्थान पर रहकर सफर समाप्त किया। 1966 के बाद यह केवल तीसरा मौका है जब टीम सेमीफाइनल तक पहुंची है। हालांकि, कोच थॉमस टशेल की रणनीति को लेकर टीम के अंदर असहमति और अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल में मिली हार के बाद सवाल उठ रहे हैं कि इस प्रदर्शन को कैसे देखा जाना चाहिए।
‘एक कड़वी निराशा… वही पुरानी कहानी’
भले ही यह 60 वर्षों में इंग्लैंड का सर्वश्रेष्ठ विश्व कप प्रदर्शन रहा हो, लेकिन इसे या तो औसत माना जा सकता है या फिर एक विफलता। इसे एक कड़वी निराशा के रूप में ही देखा जा रहा है। कोच थॉमस टशेल को उन बाधाओं को पार करने के लिए लाया गया था जिन्होंने इंग्लैंड को पहले विश्व कप जीतने से रोका था, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ मिली हार ने पुरानी कहानी को ही दोहराया। टशेल अपने क्लब कोचिंग करियर में नॉकआउट मैचों के विशेषज्ञ रहे हैं, लेकिन दबाव के क्षणों में वे विफल रहे। अर्जेंटीना के खिलाफ टीम की रक्षात्मक रणनीति ने उनकी हार में बड़ी भूमिका निभाई। भविष्य में जब इस विश्व कप का विश्लेषण किया जाएगा, तो इसे एक और बड़े टूर्नामेंट के रूप में देखा जाएगा जहां इंग्लैंड महत्वपूर्ण क्षणों में चूक गया।
सेमीफाइनल में हार के बाद टीम का माहौल कैसा है?
सेमीफाइनल में दिल तोड़ने वाली हार के बाद इंग्लैंड की टीम काफी निराश थी। कोच टशेल अक्सर टीम में ‘भाईचारे’ की बात करते हैं और खिलाड़ियों ने इसी आपसी जुड़ाव के सहारे खुद को संभाला। तीसरे स्थान के लिए फ्रांस के खिलाफ मैच के दौरान सहायक कोच एंथनी बैरी ने कहा, “खिलाड़ी टूटे हुए दिलों के साथ खेल रहे हैं।” साथ ही, अर्जेंटीना के खिलाफ मैच के अंतिम क्षणों में टशेल की रणनीति को लेकर भी टीम में मतभेद थे। खिलाड़ियों का मानना था कि टशेल के बदलाव बहुत अधिक रक्षात्मक थे, जिस पर खिलाड़ियों के बीच निजी तौर पर चर्चा भी हुई है।
थॉमस टशेल का भविष्य क्या है?
अर्जेंटीना के खिलाफ हार के तुरंत बाद फुटबॉल एसोसिएशन ने टशेल का समर्थन किया। फिलहाल योजना यही है कि जर्मन कोच यूरो 2028 तक टीम के साथ बने रहेंगे। हालांकि, टूर्नामेंट की समीक्षा के दौरान सेमीफाइनल की हार पर चर्चा निश्चित है। मियामी में फ्रांस के खिलाफ मैच से पहले जब टशेल का नाम घोषित हुआ, तो समर्थकों ने उन्हें हूटिंग की। प्रशंसकों का गुस्सा अभी भी बरकरार है, जिसका असर फुटबॉल एसोसिएशन के भविष्य के निर्णयों पर पड़ सकता है।
विश्व कप में किसका प्रदर्शन रहा शानदार?
हैरी केन और जूड बेलिंगहैम ने पूरे टूर्नामेंट में इंग्लैंड को मजबूती प्रदान की। कांगो, मैक्सिको और नॉर्वे के खिलाफ जीत में इन दोनों का अहम योगदान रहा। बेलिंगहैम ने सात गोल किए, जो केन से एक अधिक था। अब सवाल यह है कि क्या 36 वर्षीय केन 2030 के विश्व कप में खेल पाएंगे? इनके अलावा जेद स्पेंस का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा, जिन्होंने अर्जेंटीना के खिलाफ एक शानदार गोल-सेविंग टैकल किया। एंथनी गॉर्डन और बुकायो साका ने भी तीन-तीन असिस्ट किए।
यूरो 2028 जीतने के लिए इंग्लैंड को क्या सुधार करने होंगे?
इंग्लैंड को ऐसी मानसिकता विकसित करनी होगी जो उन्हें 1966 के बाद पहली बार सफलता दिला सके। टशेल ने टीम को बेलिंगहैम और केन जैसे खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द बुना है, लेकिन यूरो 2028 से पहले टीम को अपनी रणनीति में स्पष्टता लानी होगी। उन्हें अधिक प्रभावशाली और लचीला बनने की आवश्यकता है। भविष्य में टीम में रियो नगुमोआ और मैक्स डाउमैन जैसे युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी शामिल हो सकते हैं। फ्रांस के खिलाफ छह गोल की जीत ने टीम की आक्रामक क्षमता को तो दिखाया है, लेकिन एक और विफलता के बाद अब कोच टशेल पर टीम में आवश्यक बदलाव लाने का भारी दबाव है।
