48 टीमों वाला पहला वर्ल्ड कप: रोमांच और विवादों से भरी टूर्नामेंट की मुख्य झलकियां
कनाडा, मैक्सिको और अमेरिका में आयोजित 48 टीमों वाले पहले फुटबॉल वर्ल्ड कप ने दर्शकों को रोमांचक खेल और कई दिलचस्प कहानियां दी हैं। पांच सप्ताह से अधिक समय तक चले इस टूर्नामेंट के मुख्य बिंदुओं पर नजर डालते हैं।
गोल्डन बूट की दौड़
गोल्डन बूट के लिए मुकाबला टूर्नामेंट की शुरुआत से ही काफी रोमांचक रहा। इसमें लियोनेल मेसी, किलियन एम्बाप्पे, एर्लिंग हालैंड और हैरी केन जैसे दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी शामिल रहे। शनिवार को इंग्लैंड के हाथों फ्रांस की 6-4 से हार के बाद एम्बाप्पे ने दो गोल किए। अब रविवार को होने वाले फाइनल से पहले वे मेसी से दो गोल आगे हैं। एम्बाप्पे वर्ल्ड कप इतिहास में 22 गोल के साथ सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं, जो मेसी से एक गोल अधिक है।
छोटी टीमों का शानदार प्रदर्शन
डेब्यू करने वाली केप वर्डे की टीम ग्रुप स्टेज में अजेय रही। उन्होंने स्पेन और उरुग्वे जैसी पूर्व चैंपियन टीमों के समूह से क्वालीफाई किया। टीम के खिलाड़ी डेरोय डुआर्टे ने इसे किसी परी कथा जैसा बताया। इस अफ्रीकी देश ने डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर दी और अतिरिक्त समय तक मुकाबले को ले गए। वहीं, आबादी के लिहाज से वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाला सबसे छोटा देश कुराकाओ भी सुर्खियों में रहा, जिसने जर्मनी के हाथों 7-1 की हार के बाद इक्वाडोर को गोलरहित ड्रॉ पर रोका।
अर्जेंटीना की वापसी
डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना वर्ल्ड कप 2026 में कई बार कमजोर नजर आई, लेकिन उन्होंने हर बार जीत हासिल की। उन्होंने ग्रुप स्टेज को आसानी से पार किया, लेकिन केप वर्डे और मिस्र के खिलाफ उन्हें संघर्ष करना पड़ा। क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड को हराने के लिए उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ी और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम हार के कगार पर थी। अर्जेंटीना का शानदार खेल भले ही न दिखा हो, लेकिन उनकी कभी हार न मानने की जिद ही उनकी असली ताकत रही।
बालोगुन विवाद
वर्ल्ड कप के दौरान मैदान से बाहर कोई खास विवाद नहीं था, लेकिन अमेरिकी फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन राजनीतिक तूफान के केंद्र में आ गए। बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में लाल कार्ड मिलने के बाद उन पर प्रतिबंध लगा था, जिसे फीफा ने हटा दिया। इस फैसले की कड़ी निंदा हुई, विशेषकर तब जब यह पता चला कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसमें हस्तक्षेप किया था। राउंड ऑफ 16 में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर बाहर कर दिया।
हालैंड का सोशल मीडिया जलवा
एर्लिंग हालैंड ने नॉर्वे को वर्ल्ड कप में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद की और सोशल मीडिया पर भी छा गए। टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से उनके इंस्टाग्राम पर 3 करोड़ नए फॉलोअर्स जुड़े हैं और अब उनकी संख्या 7.1 करोड़ के पार है। उनके पोस्ट में ‘वाइकिंग रो’ काफी चर्चा में रहा, जिसमें खिलाड़ी नॉर्वेजियन प्रशंसकों के साथ एक काल्पनिक वाइकिंग नाव में लयबद्ध तरीके से रोइंग करते दिखे।
फॉकलैंड विवाद
अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल से पहले फॉकलैंड द्वीप समूह (जिसे स्पेनिश में मालविनास कहा जाता है) को लेकर विवाद हावी रहा। अर्जेंटीना ने एक गोल से पिछड़ने के बाद मैच 2-1 से जीता और चार वर्ल्ड कप में तीसरी बार फाइनल में जगह बनाई। मैच के बाद खिलाड़ियों ने एक बैनर प्रदर्शित किया जिस पर लिखा था, “लास मालविनास सोन अर्जेंटिनास”। ब्रिटेन ने इस मामले में फीफा से जांच की मांग की है, जिस पर फीफा ने कहा कि वह मैच रिपोर्ट का आकलन कर रहा है।
