फीफा वर्ल्ड कप: सेमीफाइनल में इंग्लैंड की हार के पीछे कोच थॉमस टशेल की रणनीति बनी विलेन
अटलांटा: फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को अर्जेंटीना के हाथों 2-1 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही इंग्लैंड का 60 साल बाद वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया। मैच के अंतिम क्षणों तक जीत के करीब दिख रही इंग्लिश टीम ने बढ़त गंवा दी और अर्जेंटीना ने जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।
मैच के बाद जुड बेलिंगम समेत पूरी इंग्लिश टीम स्तब्ध नजर आई। हार के बाद जहां अर्जेंटीना जश्न मना रही थी, वहीं इंग्लैंड के खिलाड़ी मैदान पर निराश बैठे दिखाई दिए। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यह हार केवल किस्मत का खेल नहीं, बल्कि पूरी तरह से रणनीति की विफलता थी। इसके लिए इंग्लैंड के कोच थॉमस टशेल को जिम्मेदार माना जा रहा है।
टशेल ने मैच के अंतिम 20 मिनटों में ‘पार्क द बस’ (रक्षात्मक) रणनीति अपनाई। उन्होंने अपनी टीम के डिफेंडरों को गोल पोस्ट के काफी पीछे तैनात कर दिया, जिससे इंग्लैंड ने गेंद पर नियंत्रण खो दिया और आक्रमण करने की कोशिशें पूरी तरह बंद कर दीं। अपनी इस रणनीति पर टशेल ने कहा, “हारने के बाद आलोचना होना स्वाभाविक है। मुझे नहीं लगता कि अगर हम कोई और फैसला लेते तो नतीजे अलग होते।”
इंग्लिश स्ट्राइकर हैरी केन ने कहा, “हम एक गोल की बढ़त को बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन खेल में 20 मिनट और इंजरी टाइम बहुत लंबा समय होता है। हम दबाव नहीं बना पाए और विपक्षी टीम ने इसका पूरा फायदा उठाया।”
मैच के दौरान अर्जेंटीना ने जोखिम लेते हुए लगातार आक्रमण किए, जबकि इंग्लैंड की टीम अपनी बढ़त बचाने के लिए पूरी तरह रक्षात्मक हो गई थी। कोच टशेल ने स्वीकार किया कि उनकी टीम अंतिम समय में सक्रिय नहीं रही, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
यह हार इंग्लैंड के लिए किसी पुराने जख्म की तरह है। साल 1996 के बाद से इंग्लैंड की टीम नॉकआउट दौर में 8 बार एक गोल की बढ़त बनाने के बावजूद मैच हार चुकी है। इस बार भी कोच टशेल की रणनीति ने टीम को जीत की दहलीज से पीछे धकेल दिया। हालांकि, टशेल ने किसी ‘शाप’ या इतिहास के दोहराव को मानने से इनकार किया और अपनी पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की।
